बजरंग बाण शत्रु मारण तांत्रिक प्रयोग

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बजरंग बाण शत्रु मारण तांत्रिक प्रयोग

बजरंग बाण शत्रु मारण तांत्रिक प्रयोग, राम भक्त हनुमान बल, बुद्धि और विवेक के ज्ञाता माने जाते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान की पूजा करने वाले को समस्त बाधाओं से मुक्ति मिलती है और उनके स्मरण एवं दर्शन मात्र से ही सुख एवं समृद्धि में वृृद्धि होती है।

बजरंग बाण शत्रु मारण तांत्रिक प्रयोग
बजरंग बाण शत्रु मारण तांत्रिक प्रयोग

उनकी आराधना के लिए हनुमान चालीसा सर्वाधिक किया जाने वाला पाठ है। इसके  अतिरिक्त इसी पुस्तक में बजरंग बाण वर्णित है, जो पूरी तरह से मारण मंत्र की तरह काम करता है। इसके सही तरह के प्रयोग पर ध्यान देना चाहिए। वह इस प्रकार हैः-

    • बजरंग बाण की पंक्ति में कहा गया है- ‘‘ एहि बजरंग बाण जेहि मारे ताहि कहो फिर कवन उबारे।’’ इसमें जेहि शब्द की जगह पर उस व्यक्ति का नाम लेना है जिसकी बाधा से आप मुक्त होना चाहते हैं।
    • इसका पाठ किसी भी शनिवार से शुरु करते हुए सिर्फ 108 बार जाप करना चाहिए। हां, दो दिनों में इसे पूरा किया जा सकता है।
    • पाठ से पहले भगवान हनुमान की तस्वीर या मूर्ति की षोड्सोपचार की विधि से पूजा करनी चाहिए। उसके बाद पाठ आरंभ करना चाहिए। इस दौरान तेल का दीपक जलाए रखना चाहिए।
    • पूजन के समय देश, काल और गोत्र आदि का उच्चारण करते हुए उस व्यक्ति का भी नाम लिया जाना चाहिए जिससे परेशान चल रहे हों। इसी के साथ उससे छुटकारा पाने के लिए हनुमान भगवान से विनती करते हुए अच्छे कर्म करने का भी संकल्प लेना चाहिए।
    • प्ूाूजन और जाप के बाद 108 बार दिए गए मंत्र का भी 108 बार जाप करना चाहिए। वह मंत्र हैः-ऊँ हंग हनूमते नमः!

शत्रु से मुक्ति

कामकाज, कारोबार या कार्यक्षेत्र में बाधा डालने वाले शत्रु से छुटकारा पाने के लिए मारण-सम्मोह-उच्चाटन में बहुपयोगी बजरंग बाण का प्रयोग करना चाहिए। इससे षड्यंत्रकारी शत्रु का हर षड्यंत्र विफल हो जाएगा और आपकी तरक्की में गतिशीलता बनी रहेगी।

यादि कि बजरंग बाणा यदि आपको शत्रु की शत्रुता से बचाता है, तो उसे दंड भी देता है। लेकिन हां इसके लिए 21 दिनों का अनुष्ठान किया जाना चाहिए। यह व्यक्तिग की जाने वाला पूजा या साधना नहीं है, बल्कि इसे किसी जानकार गुरु या पुरोहित के सानिध्य में किया जाना चाहिए।

आकस्मिक दुर्घटना से बचाव

ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में राहु-केतु और शनि के प्रभाव के कारण आकस्मिक घटना या दुर्घटना हो सकती है। जैसे आग लगना, सड़क हादस, बीमारी, बेवहज झगड़ा-झंझट इत्यादि। मुसीबतों से छुटकारा दिलाने वाला बजरंग बाण का पाठ इनसे बचाव करता है। इसके लिए भगवान हनुमान की शरण में रहते हुए बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। साथ में सुंदरकांड का पाठ पढ़ना भी और भी अच्छा होता है।

छूटी नौकरी दोबारा पाना

बजरंग बाण पाठ से नौकरी जाने का भय जाता रहता है, या फिर नौकरी छूटने की स्थिति में दोबार नौकरी मिल सकती है। इसके लिए मंगलवार को व्रत रखते हुए हनुमान जी को नारियल चढ़ाएं। बाद में उस नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर घर के आग्नेय कोण में रख दें।

बजरंग बाण का रात्री पाठ

शत्रु को परास्त करने और व्यापार में उन्नति के साथ-साथ अटके हुए कार्य समय पर पूरे करने  के लिए बजरंग बाण का रात्री में किया जाने वाला पाठ भी खास असरकारी होता है। इसका विधि-विधान इस प्रकार हैः-

    • इस पाठ के लिए अपनी सुविधानुसार किसी भी माह में कोई मंगलवार या शनिवार का दिन निर्धारित कर लें। समय रात्री 11 बजे से एक बजे के बीच का होना चाहिए।
    • सबसे पहले घर के एकांत कमरा या आंगन, या फिर बारामदे आदि में पूरब की ओर छोटी लकड़ी की चौकी पर पीला कपडा बिछाएं। उसपर हनुमान जी की प्रतिमा या अच्छी तस्वीर रखें। इस दौरान ऊँ हनुमंते नमः का जाप करें। उनके सामने नीचे दिए गए मंत्र को एक कागज पर लिखकर रख दें। वह मंत्र इस प्रकार हैः-  ऊँ हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट््!!
    • हनुमान जी की पूजा में दीपदान का विशेष महत्व होता है। इस क्रम में पूजा से कुछ दिन पहले पांच अनाज गेंहू, चावल, मूंग, उड़द और काला तिल गंगा जल से शुद्ध कर लें। उसे पीसकर आटा बनाएं और उसकी लोई का दीपक बनाएं। इस प्रकार बने पंचमुखी दीए में तिल तेल का दीपक जलाएं, जिसे अनुष्ठान पूर्ण होने तक जलता रहना चाहिए। साथ ही गूगल और धूप का भी इंतजाम करें।
    • चौकी की के दायीं तरफ एक मिट्टी के दीपक में रूई की बाती और घी रखें। उसके सामने कुश का आसन पर इस तरह से बैठें कि आपका मुंह पूरब दिशा की ओर दीपक आपके बाई तरफ रहे।
    • शुद्ध गूगल की धूनी, धूप, लाल रंग के फूल, लाल चंदन या रोली से हनुमान जी का ध्यान करते हुए उपासना करें। 
    • यह तैयारी रात्री के ठीक 11 बजे से पहले हो जानी चाहिए। उसके बाद परमपिता परमेश्वर से अपने नाम, गोत्र और निवास स्थान का नाम लेते हुए बजरंग बाण पाठ का अनुष्ठान पूर्ण होने का संकल्प लें। जैसे ही 11 बजे ऊपर दिए मंत्र ऊँ हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्!! का 108 बार जाप करें। 
    • यह जाप पांच मिनट मंे पूरा हो जएगा। जाप के समय फट् उच्चारण करने के समय दो उंगलियों से दूसरे हाथ पर हथेली पर ताली बजाएं।
    • बजरंग बाण का पहला हिस्सा चार पंक्तियों में ध्यान का है, उसके बाद दोहा दिया गया है। उसके बाद चैपाइयां और अंत में दोहा दिया गय है।
    • उसके बाद बजरंग बाण का पाठ आरंभ करें। यदि यह याद है तो बहुत अच्छा।  किताब पढ़कर स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ इस तरह से करें जैसे आपने इस कंठस्थ कर रखा हो। यह पाठ रात्री के एक बजे तक करें और उसके बाद एक बार फिर जाप शुरूआत से पहले वाले मंत्र का 108 बार जाप करें। 
    • इस विधि से बजरंग बाण एक रात्रा में आपके द्वारा सि़द्ध हो जाएगा। सिद्ध किया हुआ बजरंग बाण का पा आपके जीवन में कई चमत्कारी प्रभाव दिखा सकता है।

कुछ मान्यताएं

बजरंग बाण के बारे में कुछ अकाट्य मान्यताएं भी हैं। जिसके अनुसार इसका प्रयोग हर किसी को हर समय नहीं करना चाहिए। छोटी-छोटी समस्याओं में तो बिल्कुल भी नहीं। जब व्यक्ति घोर संकट में हो तभी इसका प्रयोग फलदायी साबित होता है। ऐसा नहीं करने पर हनुमान के अदृश्य क्रोध का भी सामना करना पड़ सकता है    

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