परीक्षा में सफलता के उपाय

[Total: 10    Average: 5/5]

परीक्षा में सफलता के उपाय

परीक्षा में सफलता के उपाय: यह सच है कि पढ़ाई और प्रतियोगिता-परीक्षा में सफलता ईश्वर की पूजा-अर्चना व प्रार्थना प्रयत्न के बगैर संभव नहीं है। यानि प्रयत्नहीन प्रार्थना प्रार्थना कदापि नहीं हो सकती है, लेकिन इसमें भी अकाट्य सच्चाई छिपा है कि प्रार्थना से मानसिक शांति, संतुष्टि और एकाग्रता की शक्ति प्राप्त होती है और फिर इससे कार्य के प्रति समर्पण, आत्मविश्वास और सक्रियता की भावना प्रबल हो जाती है। प्रतिदिन प्रार्थना, मंत्र जाप और अपनाए जाने वाले विविध उपायों से परीक्षार्थियों को परीक्षा के दरम्यान एक आंतरिक साहस की अनुभूति होती है और पाठ्यक्रमों के प्रति मानसिक स्थिरता बनने के साथ-साथ पाठों को याद रखने और परीक्षा देते समय उसे सिलसिलेवार ढंग से उपयोग में लाने संबंधी याद्दाश्त में मजबूती आती है। आईए जानते हैं कुछ वैसे अचूक मंत्रों और सटीक उपायों के बारे में, जिससे प्रतियोगिता या सामान्य कक्षा की परीक्षाओं में असाधारण सफलता हासिल होती है।

परीक्षा में सफलता के उपाय
परीक्षा में सफलता के उपाय

सरस्वती बीज मंत्र

सफेद परिधान में वीणा बजाती हुई, मंद-मंद मुस्कान के साथ हंस पर विराजमान मां सरस्वती जीवन में अज्ञानता को दूर कर ज्ञान-विज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। व्यक्ति का जीवन व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक स्तर पर अलौकिक, असाधारण एवं सार्थक बन जाता है। हिंदू शास्त्रों में देवी सरस्वती को विद्यादायनी कहा गया है और उनकी आराधना के बीज मंत्र के अतिरिक्त कई अन्य मंत्र भी बताए गए हैं। मां सरस्वती का बीज मंत्र ‘ऐं है।

इसे वाग्बीज भी कहा गया है। किसी भी बौद्धिक कार्यों में सफलता की कमान इसी बीज मंत्र के उपयोग से पूर्ण हो पाती है। अर्थात विद्या, ज्ञान और वाक् यानि वाणि सिद्धि की के यह बहुत ही उपयोगी है। इसका जाप सफेद आसन पर बैठ पूरब की ओर मुखकर किया जाता है। जिस तरह से बीज पौधे के उत्पत्ति के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार इस बीज मंत्र से ज्ञान के भंडार रूपी पौधे की उत्पत्ति होती है। यह दैवीय ऊर्जा प्रदान करता है और इसकी साधना करने वाला व्यक्ति इसके प्रभाव में आकर सकारात्मक कार्य करने में हर तरह से सक्षम बन जाता है।

अन्य मंत्रः देवी सरस्वती की आराधना-उपासना के लिए दूसरे कुछ मंत्र इस प्रकार हैं, जिनमें गायत्री मंत्र के जाप से देवी अति प्रसन्न होती हैं।

मंत्रः ऊँ वाग्दैवयै च विद्य्हे कामराजाय धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात्।

इसके जाप करने का सिलसिला जैसे-जैसे आगे बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे लाभ के मार्ग प्रशस्त होने लगता है। पहले दिन पांच माला (एक माला में 108 बार) का जाप करने से मां सरस्वती प्रसन्न होकर अगर मन-मस्तिष्क में ज्ञान-विज्ञान का संचार कर देती है, तो इस जाप को सुनिश्चित नियमबद्धता के साथ करने से त्राटक गुण अर्थात एकाग्रता आ जाती है। कोई विद्यार्थी अगर प्रतिदिन इस मंत्र का जाप करे तो उसकी स्मरण शक्ति में गजब की बढ़ोत्तरी हो जाएगी, और उसे कोई भी पाठ असानी से समझ में आ जाएगा या कंठस्थ हो जाएगा। इसी के साथ नीचे दिए गए मंत्रों का जाप भी लाभकारी होता है।

मंत्र:

  1. ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां,

सर्व विद्यां देही दापय-दापय स्वाहा!

2.वंदना मंत्रः सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमो नमः,

वेद वदांत विद्यास्थानेभ्य एव च।

सरस्वति महाभागे विद्ये कमललोचन,

विद्यारूपे विशालाक्षी विद्यां देहि नमोस्तुते।

मंत्र 3. ऊँ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः!

मंत्र 4. वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि, मंगलानां च कत्र्तारौ वन्दो वाणी विनायकौ।

इस मंत्र का गूढ़ अर्थ मनुष्य के वाणी और आचार-व्यवहार को दर्शाता है। श्रीरामचरित मानस के इस मंत्र समान श्लोक में कहा गया है कि अक्षर, शब्द, अर्थ और छंद का ज्ञान देने वाली भगवती सरस्वती और मंगलकर्ता विनायक की मैं वंदना करता हूं।

मंत्र 5. जेहि पर कृपा करहिं जन जानि,

कवि उर अहिर नचावहिं वानी।

मोरि सुधरहिं सो सब भांति,

जासु कृपा नहिं कृपा अघाति

परीक्षा में सफलता दिलाने वाला भगवान श्रीराम का यह मंत्र अचूक असर वाला है। इसी तरह से यदि निम्न मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप किया जाए तब न केवल स्मरण शक्ति तेज होती है, बल्कि पढ़ाई में सफलता पाने का आत्मविश्वास भी मजबूत होता है। इससे संबंधित महाकवि तुलसीदास द्वारा रचित मंत्र हैः– गुरु गृह पढ़न एग रघुराई, अल्प काल विद्या सब पाई।

विद्या प्राप्ति के लिए कुछ और सिद्ध मंत्र विद्यार्थी परीक्ष के निकट आने पर जाप कर सकते हैं। यदि विद्यार्थि द्वारा इसका पाठ संभव नहीं हो पाए तो इसे उसके माता-पिता द्वारा किया जा सकता है। इसे अचूक असर वाला बताया गया है। वे मंत्र इस प्रकार हैंः-

मंत्र 1. ऊँ शारदा माता ईश्वरी, मैं नित सुमरि तोय,

हाथ जोड़ अरजी करूं विद्या वर दे मोय।

मंत्र 2. शारदायै नमस्तुभ्यं, मम ह्रदये प्रवेशिनी,

परीक्षायां समुत्र्तीर्णं, सर्व विषय नाम यथा।

 कुछ टोटकेः यदि आप चाहते हैं कि पढ़ाई सुचारू रूप से चलती रहे, आर्थिक तंगी, पाठ्य-पुस्तकें या फीस आदि संबंधी किसी भी तरह की बाधा नहीं आने पाए और परीक्षा में सफलता सुनिश्चत हो सके, तो इसके लिए यहां दिए गए कुछ टोटके आजमाए जा सकते हैं।

  • अपने अध्ययन कक्ष में देवी सरस्वती की तस्वीर अवश्य लगाएं। पढ़ाई शुरू करने से पहले तीन अगरबत्ती दिखाएं और किसी एक मंत्र का 11 बार जाप अवश्य कर लें, या वंदना मंत्र पढ़ लें।
  • अध्ययन में आई रूकावटों के साबूत हल्दी की एक छोटी गांठ के द्वारा भी दूर किया जा सकता है। विद्यार्थी को इसे पीले कपड़े में लपेटकर पढ़ाई के स्थान पर रखना चाहिए। इससे पढ़ाई संबंधी तमाम तरह की बाधाएं दूर हो जाती हैं।
  • परीक्षा में सफल होने के लिए रविवार को ठीक सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में शुद्ध वा साफ जल भरें। उसमें कुमकुम या लाल चंदन, शक्कर या मिश्री के कुछ दानें और लाल गुलाब के फूल डालकर सूर्य देव को अध्र्य दें। इसी के साथ मंदिर में लाल वस्तु का दान करें, जो खाने-पीने या पहनने की वस्तुएं हो सकती हैं। उस दिन नमक रहित भोजन ग्रहण करें। यह उपाय परीक्षा में निश्चित सफलता दिलवाएगा।
  • यदि किसी को पढ़ाई में मन नहीं लगता हो, तो उसे शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को प्रातःकाल एक उपाय अवश्य करें। इसके लिए सूर्योदय से पहले इमली की 22 पत्तियां तोड़ लाएं। उसमें से 11 पत्तियों को ठीक सूर्योदय के समय सूर्यदेव को अर्पित करें। बची हुई पत्तियों को अपनी किसी पुस्तक में रख दें। इसे उस विषय की पुस्तक में भी रखा जा सकता है, जिससे मन उचाट होता है।
  • यदि पाठ याद नहीं हो पा रहा हो, तो स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा के समय हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुंहकर पढ़ाई करनी चाहिए। ऐसा करने से स्मरण शक्ति बढ़ जाती है।
  • परीक्षा में मनचाहा अंक प्राप्त करने या कहें अध्ययन के अनुरूप अंक आने के लिए देवी दुर्गा की आराधना करना चाहिए। इसके लिए जिस कलम से परीक्षा देना हो उसे मंदिर में मां दुर्गा के समने रख दें। अगले दिन उसी कलम से परीक्षा दें। इसमें पुजारी की मदद ली जानी चाहिए। इस प्रयोग को घर में भी देवी दुर्गा की तस्वीर के सामने किया जा सकता है।
  • अध्ययन में तेजी लाने और पाठ्य-पुस्तकों के विषय को सही तरह से समझ में आने के लिए मां सरस्वती के बीज मेंत्र से अभिमंत्रित त्रिधातु का कड़ा पहनना चाहिए।